कानपुर, 30 अगस्त (Udaipur Kiran) । अमेरिका की ओर से भारतीय चमड़ा उद्योगों पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने से माल निर्यात करने वाले व्यापारियों को तगड़ा झटका लगा है। अमेरिका के इस फैसले के बाद करीब 20 प्रतिशत का व्यापार रुक गया है। जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान भी हुआ है। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में चर्म उद्योग के पदाधिकारियों की हुई बैठक में यह सुनिश्चित किया गया कि अब अमेरिका से व्यापार नहीं किया जाएगा।
कानपुर के चर्म उद्योग ने अब स्वदेशी कंपनियां बनाकर भारत के ही बाजारों में ज्यादा से ज्यादा अपना माल बेचा जाएगा। इसके अलावा अफ्रीका और रसिया जैसे देशों को अपना माल निर्यात करेंगे। इसका एक फायदा यह भी होगा कि इन देशों से हमारे व्यापारिक रिश्ते मजबूत होंगे। यह बातें शनिवार को चर्म निर्यात परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष असद इराकी ने कही।
कानपुर में चमड़े का उद्योग काफी बड़े पैमाने पर होता है। यहां पर छोटी बड़ी मिलाकर 400 से भी ज्यादा टेनरियां हैं। इससे पहले कोविड के वजह से व्यापार काफी कम हो गया था। जिस वजह से यहां पर रोजी-रोटी कमाने के लिए प्रवासी मजदूरों ने घर का रुख कर लिया था। हालांकि धीरे-धीरे गाड़ी पटरी पर आई लेकिन एक बार फिर से अमेरिका ने टैरिफ लागू कर चर्म उद्योग पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है। जिससे कहीं न कहीं 20 से 25 प्रतिशत व्यापार पर असर देखने को मिलेगा।
असद इराकी ने आगे बताया कि यूनाइटेड किंगडम इंपोर्ट और एक्सपोर्ट का एक बड़ा हब है। चर्म उद्योग से जुड़े व्यापार का 20 से 25 प्रतिशत व्यापार अमेरिका जैसे देश से होता है, लेकिन एकाएक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 50 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ जोड़ने से यह बढ़कर 56 से 62 प्रतिशत शुल्क हो गया है। जिससे माल काफी महंगा हो जाएगा, जो हमें बिल्कुल भी स्वीकार नहीं है। इससे पहले छह से 12 प्रतिशत ही शुल्क लगता था। अब हमारे संगठन ने यह फैसला लिया है कि हम अपने उत्पाद भारत के साथ-साथ रसिया और अफ्रीका जैसे देशों को निर्यात करेंगे। इसके अलावा जितने भी ऑर्डर थे, सभी को निरस्त कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि भारत अकेले यूएसए से सालाना करीब 10 हजार करोड़ रुपये का व्यापार होता है। जिसमें यूपी में अकेले उन्नाव और कानपुर का मिलाकर करीब 2 हजार करोड़ रुपये का सालाना टर्नओवर है। इस लेदर इंडस्ट्री से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब आठ से 10 लाख लोगों की रोजी-रोटी जुड़ी हुई हैं। वहीं अमेरिका से व्यापार बंद होने से करीब डेढ़ से दो लाख लोग बेरोजगार हो जाएंगे।
लेदर कारोबारी अबरार अहमद ने कहा कि एक तो पहले ही कानपुर का चमड़ा उद्योग काफी कम हो चुका है। ऊपर से अमेरिका के इस फैसले का सीधा असर हमारे व्यापार पर पड़ेगा और रही बात दूसरे देशों से व्यापार करने की तो यह भी इतना आसान नहीं है। इसमें भी कुछ समय लग सकता है। अब हमें सरकार से दरकार है कि वह जल्द से कोई फैसला ले, ताकि हमारा (चर्म) व्यापार पहले की तरह एक बार फिर से पटरी पर वापस लौट सके।
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(Udaipur Kiran) / रोहित कश्यप
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