वक्फ संशोधन विधेयक आज लोकसभा में पेश किया जाएगा। यह विधेयक प्रश्नकाल के बाद दोपहर 12 बजे सदन में पेश किया जाएगा। अध्यक्ष ने इस मामले पर चर्चा के लिए 8 घंटे का समय आवंटित किया है। इसमें से 4 घंटे 40 मिनट सरकार को दिए गए हैं। विपक्ष के पास अभी शेष समय है। चंद्रबाबू नायडू की टीडीपी और नीतीश कुमार की जेडीयू ने विधेयक को समर्थन देने की घोषणा की है। दोनों पार्टियों ने सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। दूसरी ओर, विपक्ष इस विधेयक का विरोध कर रहा है।
कौन सी पार्टियाँ विरोध कर रही हैं?सभी विपक्षी दल इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। इसमें कांग्रेस, सपा, राजद, टीएमसी, डीएमके, वाम दल, एआईएडीएमके, बीआरएस, बीजेडी और असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम शामिल हैं। इन दलों के सांसदों की कुल संख्या 234 है। दूसरा सवाल यह है कि अगर मतदान हुआ तो क्या पूरा विपक्ष विधेयक का विरोध करेगा? यह भी देखने लायक बात होगी। ऐसी खबरें हैं कि कुछ विपक्षी दल जो तटस्थ हैं, मतदान के दौरान राज्यसभा से अनुपस्थित रह सकते हैं। ऐसी स्थिति में सरकार को विधेयक पारित कराने में कोई कठिनाई नहीं होगी।
जानें लोकसभा-राज्यसभा का गणितलोकसभा में कुल 543 सांसद हैं। बहुमत के लिए 272 सांसदों का समर्थन आवश्यक है। एनडीए के पास फिलहाल 294 सांसद हैं। जबकि भारत गठबंधन के पास 234 सांसद हैं। ऐसी स्थिति में यदि मतदान हो जाए तो सरकार आसानी से विधेयक को लोकसभा में पारित करा सकती है। राज्य सभा में सदस्यों की संख्या 245 है। वर्तमान में 236 सांसद हैं। ऐसी स्थिति में सरकार के पास 121 सदस्यों का समर्थन है। इनमें से 115 सांसद एनडीए के हैं जबकि 6 सांसद मनोनीत सदस्य हैं। इसमें भाजपा के 96 सांसद हैं। इसके अलावा जेडीयू के 4, टीडीपी के 2 और अन्य छोटे दलों के सांसद हैं। इस विधेयक को पारित करने के लिए सरकार को राज्यसभा में 119 सांसदों के समर्थन की आवश्यकता है। जो बहुमत से दो अधिक है।
जेपीसी रिपोर्ट 13 मार्च को प्रस्तुत की गई।यह विधेयक इससे पहले 19 फरवरी को कैबिनेट के समक्ष रखा गया था। जिसे मंजूरी मिलने के बाद संसद में पेश किया गया था। लेकिन विपक्ष की मांग पर विधेयक को जेपीसी को भेज दिया गया। जेपीसी ने 13 मार्च को संसद में इस विधेयक पर 655 पन्नों की रिपोर्ट पेश की थी। वहीं जेडीयू और टीडीपी ने सरकार को तीन सुझाव दिए थे जिन्हें सरकार ने स्वीकार कर लिया था। इसमें कहा गया है कि कानून को पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू नहीं किया जाना चाहिए। इसमें पुरानी मस्जिदों, दरगाहों और धार्मिक स्थलों से छेड़छाड़ तथा भूमि संबंधी मामलों में राज्यों की राय लेने का प्रावधान भी शामिल है।
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